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खुशखबरी! सरकार ने रोजगार जनरेशन प्रोग्राम (PMEGP) को 5 साल के लिए बढ़ाया

Employment Generation Program : सरकार ने प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। यह गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता करके देश भर में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की सुविधा प्रदान करेगा। सरकार पर इस योजना को लेकर 13,554.42 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

Employment Generation Program में मिलेगी सब्सिडी

साल 2008-09 में रोजगार जनरेशन प्रोग्राम (Employment Generation Program) की स्थापना के बाद से लगभग 7.8 लाख सूक्ष्म उद्यमों को 19,995 करोड़ रुपये की सब्सिडी के साथ 64 लाख व्यक्तियों के लिए अनुमानित स्थायी रोजगार पैदा करने में सहायता मिली है। सहायता प्राप्त इकाइयों में से लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और लगभग 50 प्रतिशत इकाइयाँ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला श्रेणियों के स्वामित्व में हैं।

इस योजना को 15th Finance Commission की अवधि के लिए यानि वर्ष 2021-22 से पांच वर्ष के लिए वर्ष 2025-26 तक बढ़ा दिया गया है। प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) का उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से पूरे देश में युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इस योजना की समय सीमा बढ़ाने के साथ-साथ इसमें कुछ और संशोधन भी किए गए हैं।

Employment Generation Program

इसके तहत विनिर्माण इकाइयों के लिए अधिकतम परियोजना लागत को मौजूदा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं, सर्विस यूनिट्स के लिए इसे 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। PMEGP में ग्रामोद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों की परिभाषाएं भी बदली गई हैं।

पंचायती राज संस्थाओं के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों को ग्रामीण क्षेत्र माना जायेगा। नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को नगरीय क्षेत्र माना जाएगा। सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को आवेदनों को स्वीकार करने और संसाधित करने की अनुमति होगी, भले ही आवेदन ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र तक हो। आकांक्षी जिले और ‘ट्रांसजेंडर’ आवेदकों को एक विशेष श्रेणी में रखा जाएगा और वे अधिक सब्सिडी पाने के लिए पात्र होंगे।

योजना में किया गया संशोधन

विनिर्माण इकाइयों के लिए अधिकतम परियोजना लागत 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई

सेवा इकाइयों की परियोजना लागत 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई

पीएमईजीपी में ग्रामोद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है।

पंचायती राज संस्थाओं के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्रों को ग्रामीण क्षेत्र माना जायेगा।

नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र शहरी क्षेत्र माने जाएंगे।

आकांक्षी जिलों और ‘ट्रांसजेंडर’ आवेदकों को विशेष श्रेणी में रखा जाएगा। उन्हें मिलेगी ज्यादा सब्सिडी

PMEGP को बढ़ाया 5 साल के लिए

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “PMEGP को अब 13,554.42 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021-22 से 2025-26 तक पांच साल के लिए 15वें वित्त आयोग चक्र पर जारी रखने की मंजूरी दी गई है।” इसमें बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का सुनहरा मौका दिया जा रहा है।

Employment Generation Program किए बड़े बदलाव

प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं। निर्माण इकाइयों के लिए अधिकतम परियोजना लागत मौजूदा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये और सेवा इकाइयों के लिए मौजूदा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।

आकांक्षी जिलों और ट्रांसजेंडर के तहत PMEGP आवेदकों को विशेष श्रेणी के आवेदकों के रूप में माना जाएगा और उच्च सब्सिडी के हकदार होंगे। मंत्रालय ने कहा “यह योजना पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 40 लाख लोगों के लिए स्थायी अनुमानित रोजगार के अवसर पैदा करेगी। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (Prime Minister Employment Generation Program) के तहत कवर किया जाएगा।

Employment Generation Program में लोन पर उपलब्ध है सब्सिडी

PMEGP योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, महिला, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग जैसे विशेष श्रेणी के आवेदकों को लिए गए लोन पर उच्च दर पर सब्सिडी मिलती है। कुल लोन पर शहरी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में लागत का 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए यह सब्सिडी शहरी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 15 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 प्रतिशत है।

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