PM Pranam Yojana : बदल जाएगी किसानी की तस्वीर, जानें कैसे?

PM Pranam Yojana: मोदी सरकार ने कृषि में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक उर्वरकों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ सब्सिडी पर खर्च की जाने वाली बड़ी राशि को कम करने की भी योजना बनाई है। इसके लिए उर्वरक मंत्रालय ने PM Pranam Yojana की पद्धति अपनाई है।

PM Pranam Yojana

केंद्र सरकार PM Promotion of Alternate Nutrients for Agriculture Management (PM PRANAM) scheme योजना की रूपरेखा तैयार कर रही है और इस पर राज्यों से सुझाव भी मांगा है। इस योजना का उद्देश्य केंद्र पर उर्वरक सब्सिडी के बढ़ते बोझ को कम करना और फसलों पर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना है।

PM Pranam Yojana क्या है?

मोदी सरकार (Modi government) एक ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिससे सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ कम होगा और कृषि में रसायनों का उपयोग भी कम होगा। PM Pranam Yojana के तहत सरकार रासायनिक खाद का विकल्प तैयार करने पर काम करेगी।

उर्वरक मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी का आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 2.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत अधिक होगा। सरकार को 2021-22 में रासायनिक खाद पर सब्सिडी के तौर पर 1.62 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। सरकारी खजाने पर इस बोझ से बचने के लिए PM Pranam scheme लाई जा रही है।

PM Pranam Yojana को कैसे मिलेगा फंड?

मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस योजना के लिए अलग से राशि जारी नहीं की जाएगी, बल्कि रासायनिक खाद (chemical fertilizers) पर सब्सिडी के रूप में दी जा रही राशि को इस पर खर्च किया जाएगा। सब्सिडी राशि का 50 प्रतिशत राज्यों के बीच वितरित किया जाएगा, जिसमें से 70 प्रतिशत रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में बनने वाले उर्वरकों पर खर्च किया जाएगा। इसके लिए टेक्नोलॉजी और उपकरणों के साथ-साथ इंफ्रा पर भी पैसा खर्च किया जाएगा। इस योजना के तहत ग्राम, प्रखंड और जिला स्तर पर उर्वरक इकाईयां स्थापित की जाएंगी।

किसानों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि

Farmers will get incentive: राज्यों को मिलने वाले अनुदान में से 30 प्रतिशत राशि किसानों, पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों (self-help groups) को बढ़ावा देने पर खर्च की जाएगी। उनका काम रासायनिक उर्वरकों (chemical fertilizers) के उपयोग को कम करने के बारे में जागरूकता फैलाना और किसानों को इसके वैकल्पिक उर्वरकों (fertilizers) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। सरकार सालाना आधार पर यूरिया (urea) के उत्पादन और खपत को कम करने की तैयारी कर रही है।

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नोट-यह न्‍यूज वेबसाइट से मिली जानकारियों के आधार पर बनाई गई है, SarkariiYojana.in अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।

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