RBI Interest Rates : ब्याज दरें 0.50% बढ़ी, आम आदमी पे पड़ेगा जोरदार असर

RBI Interest Rates : बढ़ती महंगाई से चिंतित भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 0.50% की बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही रेपो रेट 4.90% से बढ़कर 5.40% हो गया है। होम लोन से लेकर ऑटो और पर्सनल लोन तक सब कुछ महंगा होने वाला है और आपको ज्यादा EMI देनी होगी।

RBI Interest Rates

इस बढ़ोतरी के बाद ब्याज दरें अगस्त 2019 के स्तर पर पहुंच गईं। ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए मौद्रिक नीति समिति की 3 अगस्त से बैठक चल रही थी। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जानकारी दी।

RBI Interest Rates 0.50% बढ़ाईं

मान लीजिए रोहित नाम के शख्स ने 7.55% की दर से 20 साल के लिए 30 लाख रुपये का हाउस लोन लिया है। उनकी लोन EMI 24,260 रुपये है। 20 साल में उसे इस दर से 28,22,304 रुपये का ब्याज देना होगा। यानी उन्हें 30 लाख की जगह कुल 58,22,304 रुपये चुकाने होंगे।

रोहित का कर्ज लेने के एक महीने बाद आरबीआई ने रेपो रेट (Repo Rate) में 0.50% की बढ़ोतरी की। इसी वजह से बैंक भी ब्याज दर में 0.50% की बढ़ोतरी करते हैं। अब जब रोहित का एक दोस्त उसी बैंक में कर्ज लेने आता है तो बैंक उसे 7.55% की बजाय 8.05% ब्याज दर बताता है।

रोहित का दोस्त भी 30 लाख रुपये का कर्ज सिर्फ 20 साल के लिए लेता है लेकिन उसकी EMI 25,187 रुपये आती है। यानी रोहित की EMI से 927 रुपये ज्यादा। इस वजह से रोहित के दोस्त को 20 साल में कुल 60,44,793 रुपये चुकाने होंगे। यह रोहित की राशि से 2,22,489 अधिक है।

RBI Interest Rates में लोन पर EMI बढ़ेगी

होम लोन की ब्याज़ दरें 2 प्रकार की होती हैं पहला फ्लोटर और दूसरा लचीला। फ्लोटर लोन में ब्याज दर शुरू से आखिरी तक एक समान रहती है। इस पर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दूसरी ओर जब आप लचीली ब्याज दर लेते हैं तो रेपो दर में बदलाव आपके लोन की ब्याज दर को भी प्रभावित करता है। ऐसे में अगर आपने पहले से ही लचीली ब्याज दर पर लोन लिया है तो आपके लोन की EMI भी बढ़ जाएगी।

क्या होता है Reverse Repo Rate?

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा रखने पर ब्याज देता है। जब आरबीआई को बाजार से तरलता कम करनी होती है तो वह रिवर्स रेपो दर को बढ़ा देता है। बैंक आरबीआई के पास अपनी होल्डिंग के लिए ब्याज प्राप्त करके इसका लाभ उठाते हैं। अर्थव्यवस्था में उच्च मुद्रास्फीति के दौरान आरबीआई रिवर्स रेपो (RBI Repo Rate) दर में वृद्धि करता है। इससे ग्राहकों को कर्ज देने के लिए बैंकों के पास पैसा कम हो जाता है।

RBI Interest Rates में तीन गुना बढ़ गया है रेट

मौद्रिक नीति की बैठक हर दो महीने में आयोजित की जाती है। इस वित्तीय वर्ष की पहली बैठक अप्रैल में हुई थी। तब RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था। लेकिन RBI ने 2 और 3 मई को आपात बैठक बुलाई और रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया। यह बदलाव 22 मई 2020 के बाद रेपो रेट में किया गया था। इस वित्तीय वर्ष की पहली बैठक 6-8 अप्रैल को हुई थी। इसके बाद 6 से 8 जून तक हुई मौद्रिक नीति की बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) में 0.50% की बढ़ोतरी की गई है. इसके चलते रेपो रेट 4.40% से बढ़ाकर 4.90% कर दिया गया। अब अगस्त में इसमें 0.50% की वृद्धि हुई है, जो 5.40% पर पहुंच गई है।

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