MP में लागू हुआ पेसा एक्ट, बिना लाइसेंस सूदखोरों से लिया कर्ज़ होगा माफ़

मध्यप्रदेश के भोपाल में सूदखोरों से परेशान होकर एक परिवार के आत्महत्या करने के बाद यहाँ के CM ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिवराज सिंह चौहान ने 4 दिसंबर को प्रदेश में पैसा एक्ट लगा दिया है। इस एक्ट के चलते अब 15 अगस्त 2020 तक का सूदखोरों से लिया कर्ज़ माफ़ हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है की अगर आपने सूदखोरों से बिना लाइसेंस का कर्ज लिया है, जो की 15 अगस्त, 2020 से पहले की अवधि में हो, वो माफ़ हो जाएगा।

कैसे बना पेसा एक्ट

पेसा कानून का अर्थ है ‘पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) विधेयक। इसी दृष्टिकोण से 1996 में संसद में विधेयक प्रस्तुत किया गया। दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की सहमति मिलने पर लागू हो गया। इसका मूल उद्देश्य यह था कि केंद्रीय कानून में जनजातियों की स्वायत्तता के बिंदु स्पष्ट कर दिए जाएं जिनका उल्लंघन करने की शक्ति राज्यों के पास न हो।

क्या है पेसा कानून

पेसा कानून के तहत स्थानीय संसाधनों पर ST जनजाति के लोगों की समिति को अधिकार दिए गए हैं। इससे अनुसूचित जनजाति वाली ग्राम पंचायतों को जमीन, खनिज संपदा, लघु वनोपज की सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार मिल जाएगा। पेसा एक्ट 24 अप्रैल 1996 को बनाया गया था]। पेसा कानून 10 राज्यों हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, गुजरात, और महाराष्ट्र में लागू है, लेकिन ओडिशा , मध्य प्रदेश में अब तक यह पूरी तरह लागू नहीं था। अब CM शिवराज सरकार ने इसे पूरी तरह से लागू करने का ऐलान किया है।

पेसा एक्ट से क्या फर्क पड़ेगा

पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति रिवाज, सांस्कृतिक पहचान, के इस्तेमाल के लिए सक्षम बनाया गया है। जनजातीय ग्राम सभाओं को भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के काम में अनिवार्य परामर्श की ताकत दी गई है। साथ ही खदानों और खनिजों के लाइसेंस/पट्टा देने के लिए ग्राम सभा को सिफारिशें देने का अधिकार भी दिया गया है।

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