Draupadi Murmu : द्रौपदी मुर्मू कौन हैं ? जानिए द्रौपदी के नाम पर ही मुहर क्यों लगाई गई?

Tribal Leader Draupadi Murmu : भाजपा NDA ने मंगलवार को झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू (Tribal Leader Draupadi Murmu) के नाम की घोषणा संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के खिलाफ आगामी चुनाव के लिए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में की। आज इस लेख में जानते हैं कौन हैं ये द्रौपदी मुर्मू ? जो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में खड़ी हैं।

Tribal Leader Draupadi Murmu व्यक्तिगत जीवन

Draupadi Murmu का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है। वह संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जो एक आदिवासी जातीय समूह है। द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। दंपति के दो बेटे और एक बेटी थी।Draupadi Murmu के जीवन को व्यक्तिगत त्रासदियों के चलते इनके पति और दो बेटों को खोना पड़ा।

Draupadi Murmu

Draupadi Murmu का राजनीतिक करियर

ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान वह 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार और 6 अगस्त 2002 से मई तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं। वह ओडिशा की पूर्व मंत्री और वर्ष 2000 और 2004 में रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक थीं।

वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल थी। वह ओडिशा की पहली महिला और आदिवासी नेता हैं जिन्हें भारतीय राज्य में राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के लिए मतदान 18 जुलाई को होना है और मतगणना 21 जुलाई को होनी है। 29 जून नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है।

पहली Tribal Leader Draupadi Murmu बन सकती हैं राष्ट्रपति

NDA की तरफ से द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है। BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके नाम पर मुहर लगा दी है। अगर द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनती हैं तो वे देश की पहली आदिवासी होंगी। जो देश के सर्वोच्य पद पर पहुंचेगी। द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना आजाद भारत के लिए एक बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।

Draupadi Murmu को राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए क्यों चुना

भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू का नाम का एलान करके आदिवासियों को साधने का काम किया है वहीं दूसरी तरफ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। इससे पहले भी भाजपा ने ऐसे कई एक्सपेरिमेंट किए हैं। भाजपा ने निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री मनाया फिर दलित नेता राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति के रूप में चुनना ये सभी भाजपा के एक से बढ़कर एक एक्सपेरिमेंट रहे हैं।

अब जानिए द्रौपदी के नाम पर ही मुहर क्यों लगाई गई?

इसे समझने के लिए हमने राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर प्रो. संपर्क प्रवीण मिश्रा से पूछा। उन्होंने द्रौपदी मुर्मू और भाजपा के राजनीतिक कदमों के बारे में जानकारी दी। समर्थक। प्रवीण कहते हैं, ‘नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश की राजनीति में कई नई चीजें देखने को मिली हैं. द्रौपदी मुर्मू के रूप में पहली बार एक आदिवासी महिला राज्यपाल बनी थी. अब द्रौपदी के नाम एक और इतिहास जुड़ जाएगा। बीजेपी को उम्मीद होगी कि उसे इसका राजनीतिक फायदा भी मिले. उन्होंने द्रौपदी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने की बड़ी वजहें बताईं:

अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) पर ध्यान : Draupadi Murmu आदिवासी समाज से आती हैं। यह पहली बार होगा जब कोई आदिवासी देश के सर्वोच्च पद पर काबिज होगा। इसका संदेश देश के अनुसूचित जनजाति मतदाताओं के 8.9% तक जाएगा। कई राज्यों की कई सीटों पर आदिवासी मतदाता निर्णायक हैं। ऐसे में बीजेपी ने द्रौपदी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं (Scheduled Tribe voters) को लुभाने की कोशिश की है .

नारी शक्ति (Women power) का होगा एहसास: अगर द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu ) चुनाव जीत जाती हैं तो वह राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी महिला होंगी. भारत में महिलाओं की आबादी पुरुषों के बराबर है. द्रौपदी के नाम को उम्मीदवार घोषित करने से महिलाओं में भी सकारात्मक संदेश जाएगा। लोग द्रौपदी के संघर्ष की कहानी भी जानते हैं।
माना जा रहा है कि महिला वोटरों का रुझान BJP की ओर है. इस बात का जिक्र खुद खुद प्रधानमंत्री कई बार कर चुके हैं। ऐसे में महिला अध्यक्ष बनने से बीजेपी को महिला वोटरों के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने में मदद मिल सकती है.

आदिवासी बहुल राज्यों पर फोकस : अगले दो साल में 18 राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें दक्षिण के चार बड़े राज्य भी शामिल हैं. उड़ीसा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना. वहीं, पांच राज्य ऐसे हैं जहां अनुसूचित जनजाति और आदिवासी मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है. इनमें झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र शामिल हैं. इन सभी राज्यों की 350 से अधिक सीटों पर मुर्मू फैक्टर BJP के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024): 2024 में लोकसभा चुनाव भी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 47 लोकसभा और 487 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) के लिए आरक्षित हैं। हालांकि इन सीटों पर अनुसूचित जनजाति और आदिवासी वोटरों का प्रभाव कहीं अधिक है. 2019 के लोकसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 में से 31 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी.
हालांकि विधानसभा चुनाव (assembly elections) में आदिवासी इलाकों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था. विशेष रूप से छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और राजस्थान में। ऐसे में भाजपा लोकसभा में अपनी पुरानी जीत को बरकरार रखने के लिए अनुसूचित जनजातियों को अपने साथ रखने की पूरी कोशिश कर रही है.

समानता और एकता का संदेश: द्रौपदी मुर्मू के नाम की चर्चा राष्ट्रपति पद के लिए आते ही होने लगी थी। भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है। ऐसे में किसी आदिवासी महिला को यहां से राष्ट्रपति पद तक ले जाना समानता और एकता का बड़ा संदेश देगा.

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