New Labour Codes: 29 labour laws को 4 simple labour codes द्वारा किया गया प्रतिस्थापित

New Labour Codes: हमारे देश में कई ऐसे लेबर कानून रहे हैं जो अंग्रेजों के ज़माने से रहें हैं। ऐसे कितने ही लेबर कानून रहें जो काफी समय से चले हैं लेकिन अब सरकार ने उन्हें ख़तम करने का बेड़ा उठाया है जो गुलामी से प्रेरित और गुलामी की मानसिकता से प्रेरित हैं।

New Labour Codes

देश अब ऐसे लेबर कानून को बदल रहा है , रिफार्म कर रहा है उन्हें सेट्रल बना रहा है। इसे सोच से 29 लेबर कानून को 4 सरल लेबर कोड्स में बदला गया। इस से अब न्यूनतम सैलरी , रोजगार की समस्या , सामाजिक सुरक्षा और स्वस्थ्य सुरक्षा जैसे कोड्स होंगे। नए लेबर कोड्स में इंटर स्टेट माइग्रेंट लेबर डे को भी सुधारा है और ससक्तिकरण को नयी परिभासा मिली है।

मजदूरी पर संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति संहिता – 29 श्रम कानूनों को प्रतिस्थापित करने के लिए तैयार हैं।

कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण आवश्यक

भारत के 50 करोड़ श्रमिकों में से 90% असंगठित क्षेत्र में हैं। और इन संहिताओं के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित श्रम कानूनों का लाभ उन सभी को मिले।

कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण आवश्यक है एक सशक्त, समृद्ध और आत्मानिर्भर भारत। आज़ादी के 75 साल बाद भी लगभग 90% श्रमिक असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं जिसकी सभी तक पहुंच नहीं है । कुल श्रमिकों की संख्या 50 करोड़ से ज्यादा है, संगठित और असंगठित क्षेत्रों से मिलकर बना है। यह पहली बार कि किसी भी सरकार ने मजदूरों का ख्याल रखा है।

पहले मजदूर वर्ग जाल में फंसा था। कई श्रम कानूनों के केंद्रीय सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाये हैं। उन्हें स्वतंत्रता प्रदान करने की सही दिशा का बेड़ा केंद्र सरकार ने लिया है। 29 कानूनों को 4 संहिताओं में संहिताबद्ध करने का ऐतिहासिक कदम अपनाकर सभी को सुरक्षा के साथ-साथ मिल सके
सम्मान, स्वास्थ्य और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं का लाभ।

सत्यमेव जयते से श्रमेव जयते

श्रमिकों को महत्व देते हुए जब प्रधानमंत्री मंत्री ने “श्रमव जयते” शुरू किया।
श्रमिकों को “राष्ट्र निर्माता” के रूप में, उन्होंने कहा था कि के विकास के लिए “श्रमव जयते” की शक्ति देश में “सत्यमेव जयते” के बराबर।

न्यूनतम मजदूरी सभी के अधिकार

चार श्रम कानूनों को न्यूनतम मजदूरी संहिता से समामेलित किया गया है । पहली बार सभी मजदूरों को मिला न्यूनतम मजदूरी का अधिकार ।

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