New Labour Laws : एक जुलाई से नए श्रम कानून! कैसे बदलेंगे काम के घंटे

New Labour Laws : केंद्र सरकार 1 जुलाई 2022 से नए श्रम कानूनों (New Labour Laws) को लागू करने की योजना बना रही है। अगर इसे लागू किया जाता है तो कार्यालय के काम के घंटे, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योगदान और हाथ में वेतन में महत्वपूर्ण बदलाव होगा। जबकि कार्यालय के घंटे और पीएफ योगदान में वृद्धि की संभावना है, हाथ में वेतन में कमी की संभावना है।

New Labour Laws सरकार जल्द करेगी लागू

सरकार जल्द से जल्द चार नए श्रम संहिताओं के एक सेट को लागू करने के लिए काम कर रही है। सरकार का मानना है कि नए श्रम कानूनों से देश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। नव अधिनियमित श्रम संहिताएं मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, श्रम कल्याण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और काम करने की स्थिति से संबंधित सुधारों की एक श्रृंखला निर्धारित करती हैं।

New Labour Laws में बदलेंगे ये नियम

  1. यदि नए श्रम कानून लागू होते हैं, तो इससे कंपनियों को कार्यालय के काम के घंटों में महत्वपूर्ण बदलाव करने की अनुमति मिलेगी। वे कार्यालय के काम के घंटे 8-9 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर सकते हैं। लेकिन उन्हें अपने कर्मचारियों को तीन साप्ताहिक अवकाश देकर मुआवजा देना होगा। इसके अतिरिक्त सभी उद्योगों में एक तिमाही में श्रमिकों के लिए ओवरटाइम घंटे की अधिकतम संख्या 50 घंटे से बढ़ाकर 125 घंटे कर दी गई है।
  2. टेक-होम वेतन घटक और भविष्य निधि में नियोक्ताओं के योगदान में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। नए कोड कर्मचारी के मूल वेतन को सकल वेतन के 50% पर रख सकते हैं। इससे कर्मचारी और नियोक्ता का पीएफ योगदान बढ़ेगा। कुछ कर्मचारियों के लिए टेक होम वेतन (Take Home Salary) में कमी आएगी। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पैसे और ग्रेच्युटी की रकम में भी इजाफा होगा। इससे कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवन जी सकेंगे।
  3. सरकार ने अपने रोजगार के दौरान एक कर्मचारी द्वारा ली जाने वाली छुट्टी को युक्तिसंगत बनाने, अगले वर्ष के लिए छुट्टी को आगे बढ़ाने और रोजगार की अवधि के दौरान छुट्टी का नकदीकरण करने का भी लक्ष्य रखा है। नए श्रम संहिताओं ने अवकाश के लिए पात्रता की आवश्यकता को 240 दिनों के काम से घटाकर 180 दिनों के काम में एक वर्ष कर दिया है।
  4. वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) जो विशेष रूप से कोविड -19 महामारी के प्रकोप के बाद सभी क्षेत्रों में प्रचलित बाजार प्रथा है उसको केंद्र सरकार द्वारा सेवा उद्योग पर लागू होने वाले ड्राफ्ट मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर में मान्यता दी गई है। अब तक 23 राज्यों ने कथित तौर पर श्रम संहिता के नियम बनाए हैं। अन्य सात ने अभी तक नहीं किया है। संसद ने इन संहिताओं को पारित किया है।

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