PM Shri Schools: छात्रों को मिलेगी बेहतर शिक्षा, देश भर में खुलेंगे 15000 ‘पीएम श्री स्कूल’

PM Shri Schools: जैसा कि हम सभी जानते हैं शिक्षा का जीवन में सबसे अधिक महत्व है। इसी के चलते केंद्र सरकार द्वारा देश में Education system में सुधार करने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं, जिसके चलते हाल ही में सरकार द्वारा New Education Policy भी लागू की गयी है, जिसमें modern education पर जोर दिया जा रहा है। गुजरात में शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने PM Shree School स्थापित करने की घोषणा की। इसी के चलते अब देशभर में PM Shree School खोले जायेंगे। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के माध्यम से छात्रों को अच्छे भविष्य के लिए तैयार किया जायेगा और साथ ही पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से New Education Policy (NEP) को भी आगे बढ़ाया जायेगा।

PM Shri Schools

PM Shree Schools के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास किया जायेगा। Central Education Minister धर्मेंद्र प्रधान ने यह जानकारी दी कि सरकार PM Shree School स्थापित करने के लिए विचार- विमर्श कर रही है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, PM Shree Schools छात्रों के उज्जवल भविष्य को ध्यान में रख कर लेकर खोले जाएंगे, जिनमें modern facilities के साथ-साथ New Education Policy की प्रयोगशाला भी खोली जायेंगी।

PM Shri Schools

इससे छात्रों को नए तरीके से अच्छी और advanced education प्राप्त होगी और वे अपने ज्ञान का विस्तार कर पाने में सक्षम होंगे। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि स्कूली शिक्षा की वजह से ही देश की knowledge based economy का विकास होता है और इसलिए नई generation को 21वीं सदी के knowledge and skills से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने बताया कि PM Shree Schools के रूप में एक Futuristic Benchmark Model बनेगा और फिलहाल इसके लिए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से शैक्षिक वातावरण से सम्बंधित सुझाव लिए जा रहे हैं।

What are PM Shri Schools?

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय “पीएम श्री स्कूल (PM Shri Schools)” स्थापित करने की योजना बना रहा है।

प्रधानमंत्री श्री स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy NEP) 2020 की प्रयोगशाला होंगे।
वे छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए पूरी तरह से तैयार होंगे।

  • यह एनईपी के 5+3+3+4 (10+2 स्कूली शिक्षा प्रणाली को बदलने के लिए) दृष्टिकोण को पूर्व-विद्यालय से माध्यमिक तक, ECCE पर जोर, शिक्षक प्रशिक्षण और वयस्क शिक्षा को शामिल कर सकता था।
  • स्कूली शिक्षा के साथ कौशल विकास का एकीकरण होगा और मातृभाषा में सीखने को प्राथमिकता दी जाएगी जो 21वीं सदी के वैश्विक नागरिकों को तैयार करने के लिए कदम हैं।
  • चूंकि NEP 20200 शिक्षा के अधिकार अधिनियम की अवधि को भी बढ़ाता है, इसलिए अब यह 3 से 18 वर्ष की आयु तक पहुंच जाएगा।

PM Shree School की मुख्य विशेषताएं

केंद्रीय मंत्री द्वारा मिली जानकारी मुताबिक, पीएमश्री स्कूलों में छात्रों को शिक्षा हेतु Advanced facilities दी जाएगी। इन स्कूलों की मुख्य विशेषता यह होगी कि इन स्कूलों में सभी भाषाओं को महत्व दिया जायेगा और हर भाषा पर जोर दिया जाएगा, क्योंकि सरकार का कहना है कि, कोई भी भाषा Hindi या English भाषा से कम नहीं है और हर भाषा का अपना एक महत्व है। पीएमश्री स्कूलों को model school की तरह तैयार किया जाएगा और इन स्कूलों को पीएम श्री स्कूल नाम दिया जायेगा। इन स्कूलों में छात्रों की Course study के साथ- साथ skill education पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इसके साथ ही शिक्षा मंत्री ने New Education Policy के तहत pre-school से secondary school तक 5+3+3+4 approach अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहना है कि 21वीं सदी के Global citizen को तैयार करने के लिए Teachers training, adult education, और स्कूली पढ़ाई में skill development को शामिल करने के लिए और मातृभाषा में पढ़ाई को महत्व देने की अहम भूमिका रहने वाली है।

5+3+3+4 स्कूलिंग सिस्टम

NEP 2020 में उल्लिखित 5+3+3+4 की नई स्कूली शिक्षा प्रणाली के अनुसार, बच्चों को 5 साल फाउंडेशनल स्टेज में, 3 साल प्रिपरेटरी स्टेज में, 3 साल मिडिल स्टेज में और 4 साल सेकेंडरी में बिताने होंगे।
चरणों का विभाजन उस प्रकार के संज्ञानात्मक विकास चरणों के अनुरूप किया गया है जो एक बच्चा बचपन, स्कूल के वर्षों और माध्यमिक स्तर से गुजरता है।
यहां नई स्कूली शिक्षा प्रणाली के विभिन्न स्तरों का आयु-वार विश्लेषण दिया गया है:

(1) स्थापना के 5 साल:
उम्र के लिए: 3 से 8, कक्षाओं के लिए: आंगनवाड़ी / प्री-स्कूल, कक्षा 1, कक्षा 2

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा के आधारभूत चरण में 3 वर्ष या प्रीस्कूल या आंगनवाड़ी शिक्षा और उसके बाद दो वर्ष की प्राथमिक कक्षाएं (कक्षा 1 और 2) शामिल होंगी।
  • यह चरण खेल-आधारित या गतिविधि-आधारित विधियों में शिक्षण और भाषा कौशल के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।

(2) प्रारंभिक अवस्था के 3 साल:
उम्र के लिए: 8 से 11, कक्षा के लिए: 3 से 5

  • तैयारी के चरण में भाषा के विकास और संख्यात्मक कौशल पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • यहां, शिक्षण और सीखने की पद्धति खेल और गतिविधि आधारित होगी, और इसमें कक्षा की बातचीत और खोज के तत्व भी शामिल होंगे।

(3) मिडिल स्टेज के 3 साल:
उम्र के लिए: 11 से 14, कक्षा के लिए: 6 से 8

  • एनईपी 2020 के अनुसार, स्कूली शिक्षा का यह चरण महत्वपूर्ण सीखने के उद्देश्यों पर केंद्रित होगा, जो कि वर्षों से हमारी शिक्षा प्रणाली में उपयोग की जाने वाली रटकर सीखने की पद्धति से एक बड़ा बदलाव है।
  • यह चरण विज्ञान, गणित, कला, सामाजिक विज्ञान और मानविकी में प्रायोगिक शिक्षा पर काम करेगा

(4) माध्यमिक चरण के 4 साल:
उम्र के लिए: 14 से 18, कक्षा के लिए: 9 से 12

  • इस चरण में कक्षा 9 और 10 और कक्षा 11 और 12 के दो चरण शामिल होंगे।
  • इन कक्षाओं में मुख्य परिवर्तन एक बहु-विषयक प्रणाली में बदलाव है, जहां छात्रों को कला, विज्ञान और वाणिज्य श्रेणियों में कड़ाई से विभाजित होने के बजाय विभिन्न प्रकार के विषय संयोजनों तक पहुंच प्राप्त होगी, जिसे वे अपने कौशल और रुचि क्षेत्रों के अनुसार चुन सकते हैं।
  • यह चरण फिर से विचार प्रक्रिया में अधिक महत्वपूर्ण सोच और लचीलेपन को बढ़ावा देगा।
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